राहुल गांधी के खिलाफ FIR का अपना ही आदेश हाईकोर्ट ने रोका, डिहरी नागरिकता के मामले में बड़ी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता मामले में एफआईआर दर्ज करने के अपने आदेश पर रोक लगा दी. अदालत ने पहले नोटिस जारी करना आवश्यक बताया.

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Courtesy: Social Media

कांग्रेस के कद्दावर नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने मामले में एक नाटकीय मोड़ लाते हुए, राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अपने ही पहले के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है.

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी पक्ष को बिना नोटिस दिए इस तरह का एकतरफा आदेश पारित करना न्यायसंगत नहीं है. हाईकोर्ट के इस नए रुख के बाद मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को तय की गई है. इस सुनवाई पर देश भर के राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी होंगी.

कैसे पलटा फैसला?

दरअसल, शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले ओपन कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का मौखिक निर्देश दे दिया था., आदेश के टाइप और हस्ताक्षरित होने से ठीक पहले, न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी का ध्यान कुछ पुराने और अहम कानूनी प्रावधानों की तरफ गया. इसके बाद जज ने अपने ही फैसले पर दोबारा विचार करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से रोक दिया.

नोटिस देना क्यों है अनिवार्य?

अपने आदेश को रोकते हुए अदालत ने साल 2014 के एक पूर्ण पीठ के फैसले का हवाला दिया. इस कानूनी प्रावधान के अनुसार, अगर किसी निचली अदालत में एफआईआर दर्ज कराने की मांग खारिज हो जाती है और उसके खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की जाती है, तो प्रस्तावित आरोपी को नोटिस जारी कर उसका पक्ष सुनना कानूनी रूप से अनिवार्य है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और सरकारी वकीलों ने दावा किया था कि नोटिस जरूरी नहीं है, जिसके आधार पर पहले आदेश सुनाया गया था.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद कर्नाटक के रहने वाले एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से जुड़ा है. उन्होंने राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता रखने का आरोप लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के तहत विस्तृत जांच और एफआईआर की मांग की थी. इससे पहले रायबरेली की विशेष अदालत इस याचिका को खारिज कर चुकी थी, जिसके बाद मामला लखनऊ ट्रांसफर हुआ था.

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